विषय: स्वच्छ भारत और ज़िम्मेदार नागरिक
पात्र:
1. सूत्रधार (Narrator): जो कहानी को आगे बढ़ाता है।
2. काका जी (Kaka Ji): एक बुजुर्ग, जो ज्ञान बघारते हैं पर खुद गंदगी फैलाते हैं।
3. चिंटू (Chintu): एक लापरवाह युवा।
4. श्रीमती जागरूक (Shrimati Jaagruk): एक ज़िम्मेदार नागरिक।
5. कूड़ा (Kooda): कूड़े का एक चलता-फिरता ढेर (एक पात्र कूड़े के थैले/पोशाक में)।
दृश्य 1: शुरुआत और परिचय
(जगह: एक व्यस्त गली/चौक। कूड़ा (Kooda) पात्र ज़मीन पर लेटा हुआ है या कोने में बैठा है।)
(सूत्रधार (Sutradhar) ज़ोरदार आवाज़ में आता है।)
सूत्रधार:
अरे भाई! क्या हाल है?
आज का विषय है, भारत की शान!
पर ये क्या? इस नज़ारे को देख के मत होना परेशान!
बात है उस ‘स्वच्छ भारत’ की, जिसकी सब करते हैं बात,
पर काम की बारी आए तो, क्यों छोड़ देते हैं साथ!
(सूत्रधार कूड़े की ओर इशारा करता है।)
सूत्रधार:
मिलिए, हमारे पहले मेहमान से… नाम है इसका ‘कूड़ा’!
ये हर जगह मिलेगा, जहाँ है ‘ज़िम्मेदारी’ अधूरी!
(कूड़ा अजीब–सी आवाज़ निकालता है और थोड़ा–सा हिलता है।)
दृश्य 2: काका जी और चिंटू का कारनामा (हास्य)
(काका जी (Kaka Ji) हाथ में केले का छिलका लिए आते हैं। वे बड़े गंभीर दिख रहे हैं।)
काका जी:
क्या ज़माना आ गया है! देखो तो सही! ज़रा भी सफाई नहीं है देश में। सरकार को कुछ करना चाहिए! मोदी जी नेबोला, ‘स्वच्छ भारत’… पर असर कहीं नहीं दिख रहा!
(वह छिलका बोलते–बोलते ज़मीन पर फेंक देते हैं, बिल्कुल कूड़े (Kooda) के बगल में। कूड़ा (Kooda) खुशहोकर छिलके को छू लेता है।)
(तभी चिंटू (Chintu) एक चिप्स का खाली पैकेट खाता हुआ आता है।)
चिंटू:
काका जी! क्या हाल है? सरकार की बात छोड़ो, अपनी बात करो। मैं तो कहता हूँ, जो सफ़ाई कर्मचारी हैं , उसी काकाम है सफाई रखना!
(चिंटू खाली पैकेट को ज़मीन पर गिराता है। कूड़ा (Kooda) और ज़्यादा खुश होता है और एक ज़ोरदार ‘हम्म!’ की आवाज़ करता है।)
काका जी:
तुम बच्चे क्या जानो! हम अपने ज़माने में…
(काका जी अपनी पान की पीक ज़ोर से ज़मीन पर थूकते हैं। कूड़ा (Kooda) अब उछलने लगता है।)
कूड़ा (अपनी दबी हुई आवाज़ में):
वाह! वाह! और डालो… और डालो! मेरी तो दावत है! हा हा हा!
सूत्रधार:
अरे! ये क्या हो रहा है? ये दोनों तो सफाई के हीरो नहीं, ज़ीरो हैं!
दृश्य 3: श्रीमती जागरूक का प्रवेश (प्रभावशाली मोड़)
(श्रीमती जागरूक (Shrimati Jaagruk) हाथ में एक छोटा–सा कूड़ेदान (डस्टबिन) लिए आती हैं। वह शांतपर दृढ़ हैं।)
श्रीमती जागरूक:
नमस्ते काका जी! नमस्ते चिंटू! ये क्या माजरा है? आप दोनों देश की सफाई पर भाषण दे रहे हैं, पर कचरा खुद फैलारहे हैं!
काका जी:
अरे बहू! ये तो बस… गलती से हो गया! कौन देखेगा यहाँ?
चिंटू:
हाँ, आंटी! गली तो गंदी ही है, एक पैकेट और सही!
श्रीमती जागरूक:
(हाथ में थमा हुआ कूड़ेदान दिखाते हुए):
काका जी, यह ‘गलती’ नहीं, आदत है! और चिंटू, गली गंदी है, इसलिए हमें उसे और गंदा नहीं करना है, बल्कि साफ़करने की शुरुआत करनी है।
(वह केले का छिलका और चिप्स का पैकेट उठाती हैं और उन्हें अपने कूड़ेदान में डालती हैं। कूड़ा (Kooda) दुखी होकर बैठ जाता है।)
श्रीमती जागरूक:
(ज़ोर से):
याद रखिए! ‘स्वच्छ भारत’ कोई सरकारी नारा नहीं है!
स्वच्छ भारत का मतलब है, हर नागरिक का निजी संकल्प!
जब तक हर हाथ अपना कूड़ा, कूड़ेदान तक नहीं पहुंचाएगा,
तब तक हमारा देश, स्वच्छ नहीं बन पाएगा!
(काका जी और चिंटू शर्मिंदा होकर सिर झुका लेते हैं।)
काका जी:
श्रीमती जी, आज आपने आँखें खोल दीं! मैं कसम खाता हूँ… आज से मैं अपना कूड़ा सिर्फ़ कूड़ेदान में डालूँगा!
चिंटू:
हाँ! मैं भी! अब मैं ‘कूड़े का हीरो’ नहीं, ‘सफ़ाई का सिपाही’ बनूँगा!
दृश्य 4: उपसंहार और संकल्प
(सभी पात्र एक गोल घेरा बनाते हैं। कूड़ा (Kooda) पात्र अब एकदम शांत और मायूस बैठा है।)
सूत्रधार:
वाह! क्या बात है!
तो देखा आपने! ‘स्वच्छ भारत’ की सबसे बड़ी ताकत, न सरकार है, न नियम…
सबसे बड़ी ताकत है, आपकी अपनी ज़िम्मेदारी!
(श्रीमती जागरूक आगे आती हैं।)
श्रीमती जागरूक:
सड़क आपकी है! गली आपकी है! शहर आपका है!
इसे साफ़ रखना भी, आपकी ही ज़िम्मेदारी है!
आज से हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं:
(सभी पात्र एक साथ एक–एक पंक्ति दोहराते हैं, ज़ोरदार आवाज़ में। दर्शकों को भी शामिल करें।)
सभी:
1. कूड़ा! सिर्फ़ कूड़ेदान में!
2. सड़क पर थूकना, पाप है महान!
3. सफ़ाई शुरू करो, अपने घर से और दुकान से!
4. स्वच्छ भारत… मेरी ज़िम्मेदारी!
(अंतिम पंक्ति, ज़ोरदार और जोशीले अंदाज़ में।)
सभी:
“हम बदलेंगे… तो देश बदलेगा!”
(नाटक समाप्त होता है।)