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नुक्कड़ नाटक: कचरे की माया, समझ न पाया

पात्र:

• सूत्रधार (Sutradhar): नाटक का संचालक।

• श्रीमती शर्मा (Mrs. Sharma): एक मॉडर्न, लेकिन लापरवाह महिला।

• श्री गुप्ता (Mr. Gupta): उनके पड़ोसी, par थोड़े जागरूक।

• कचरा बाबू (Kachra Babu): कचरा संग्रह वाहन चालक/सहायक।

स्थान:
एक व्यस्त सड़क का कोना, जहाँ एक कचरा-गाड़ी रुकी हुई है।

(नाटक की शुरुआत ढोल या ताली की गड़गड़ाहट से होती है। सूत्रधार सामने आता है।)

सूत्रधार:
“स्वच्छता की बातें सब करते हैं,
पर निभाते कितने हैं?
आइये, देखते हैं एक छोटी सी कहानी,
जिसमें छिपी है एक गहरी निशानी!”

(कचरागाड़ी ‘Gaadi wala aya ghar se kachra nikaal – song “ बजाते हुए आती है और रुकती है।कचरा बाबू गाड़ी के पास खड़ा हो जाता है। तभी श्रीमती शर्मा अपने घर से बाहर आती हैंउन्होंने बहुतफैशनेबल कपड़े पहने हैं और उनके हाथ में एक बड़ासा कूड़े का थैला है।)

श्रीमती शर्मा:
(नखरे से) ओह गॉड! ये रोज़-रोज़ का itna कचरा… (कचरे के थैले को गाड़ी में फेंकने की कोशिश करती हैं, लेकिनहड़बड़ी में आधा कचरा गाड़ी के बाहर सड़क पर बिखर जाता है।)

श्री गुप्ता:
(अपने घर की बालकनी से झांकते हुए) अरे-अरे mrs. शर्मा ! ये क्या किया? आधा कचरा तो बाहर ही फैला दियाaapne !

श्रीमती शर्मा:
(गुस्से में) अरे गुप्ता जी, आप rehne dijiye ! मेरा काम हो गया, अब ये सब उठाना इनका (कचरा बाबू का) कामहै। inhi ki तो ड्यूटी है ये सब साफ करना!

कचरा बाबू:
(शांत और नम्रता से) बहन जी, गाड़ी में डालना आपकी ज़िम्मेदारी है, गाड़ी से उठाना मेरी। लेकिन जो आपने बाहरबिखेर दिया, वो तो गलत तरीका है ना।

श्रीमती शर्मा:
(हंसते हुए) तरीका? अरे भैया, मैं already बहुत बिजी हूँ, मेरे पास इतना टाइम नहीं है कि एक-एक lifafa alag alag karu। aap अपना काम करो,aur मुझे देर हो रही है किटी पार्टी के लिए!

(श्रीमती शर्मा जाने लगती हैं। तभी एक ‘ट्विस्ट‘ आता है – एक और कलाकारजो अब तक दर्शकों के बीच मेंथाअचानक श्रीमती शर्मा के पास आता है। यह पात्र ‘यमराज का सहायक‘ या ‘कर्मों का फल‘ जैसा कुछ होसकता है। उसने मजाकिया ढंग का मेकअप किया हुआ है।)

कर्मों का फल (या ट्विस्ट पात्र):
(श्रीमती शर्मा के सामने आकर फिल्मी अंदाज़ में) रुकिए, देवी जी! इतनी जल्दी कहाँ?

श्रीमती शर्मा:
(डरकर) तुम कौन हो? और ये क्या मज़ाक है?

कर्मों का फल:
मज़ाक नहीं, mai आपकी करनी का फल हूँ! आपने जो गंदगी फैलाई है, अब वो आपके ही पीछे पड़ेगी।

श्रीमती शर्मा:
क्या मतलब?

कर्मों का फल:
मतलब ये कि आज से जहाँ-जहाँ आप जाएंगी, ये कचरा आपके साथ चलेगा!

(वह इशारा करता है और दोतीन अन्य कलाकार तुरंत ज़मीन पर बिखरे हुए कचरे का कुछ हिस्सा(प्रतीकात्मक रूप सेउठाकर श्रीमती शर्मा के पीछेपीछे चलने का नाटक करने लगते हैं।)

श्रीमती शर्मा:
(चीखते हुए) ये क्या बकवास है! हट जाओ मेरे पीछे से!

श्री गुप्ता:
(हंसते हुए) अब भुगतो भाभी जी! जैसा कर्म वैसा फल!

कचरा बाबू:
(गंभीर होकर) बहन जी, प्रकृति का नियम है। हम जो गंदगी फैलाते हैं, वो घूम-फिरकर हमारे पास ही आती है – बीमारियों के रूप में, गंदे वातावरण के रूप में। आज आपने बाहर फेंका, कल यही मच्छर-मक्खी आपके घर मेंआएंगे।

श्रीमती शर्मा:
(घबराकर और शर्मिंदा होकर) मैं समझ गई! मैं समझ गई! प्लीज़, pehle tum इन्हें मेरे पीछे से हटाओ!

(वह तुरंत नीचे झुकती हैं और बिखरा हुआ कचरा उठाना शुरू करती हैं।)

श्रीमती शर्मा:
(कचरा बाबू से) भैया, मुझे माफ़ कर दो। आज के बाद, मैं हमेशा कूड़ा सही तरीके से, गाड़ी के अंदर ही डालूंगी।और हाँ, अलग-अलग करके भी रखूंगी – गीला और सूखा।

कचरा बाबू:
(मुस्कुराते हुए) यही तो हम चाहते हैं, बहन जी।

सूत्रधार:
तो देखा आपने, दोस्तों! स्वच्छता सिर्फ एक सरकारी अभियान नहीं, हमारी अपनी ज़िम्मेदारी है।

(सभी पात्र एक साथ मिलकर नारा लगाते हैं।)

सभी:
“हम सबका एक ही सपना,
स्वच्छ rahe भारत अपना!”
“ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे!”

(नाटक का अंत )

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